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New Delhi: दादा साहब फाल्के पुरस्कार हर साल भारत सरकार की ओर से दिया जाता है. ये पुरस्कार किसी व्यक्ति विशेष को भारतीय सिनेमा में आजीवन योगदान के लिए दिया जाता है. इस पुरस्कार की शुरूआत दादा साहब फाल्के के जन्म शताब्दी वर्ष 1969 से शुरू हुआ था. 1969 से लेकर अब तक ये पुरस्कार हर साल दिया जा रहा है. आज हम आपको बताएंगे कि भारत सरकार ने ये पुरस्कार सबसे पहले किसे दिया था.

देविका रानी को मिला था पहला अवॉर्ड

एक्ट्रेस देविका रानी को सबसे पहले दादा साहब फाल्के अवॉर्ड दिया गया. देविका रानी को आज भी सिनेमा में महत्वपूर्ण योगदान के लिए याद किया जाता है. उनका योगदान अपूर्व रहा है. देविका रानी को उस वक्त इस पुरस्कार से नवाजा गया था, जब देश की महिलाएं चार दिवारी में एक घूंघट के अंदर रहा करती थीं. जब अन्य महिलाएं घूंघट में मुंह छिपाये रहती थीं, उन दिनों देविका रानी फिल्मों में अपने अदम्य साहस का प्रदर्शन किया था. यही नहीं देविका रानी इतनी खूबसूरत थीं कि आज भी उन्हें उनकी खूबसूरती के लिए भी याद किया जाता है.

देविका राम का जन्म 30 मार्च 1908 को विशाखापट्टनम में हुआ था. खास बात तो ये है कि देविका रानी कवि रवींद्रनाथ टैगोर के वंश से संबंधित थीं. रवींद्रनाथ टैगोर उनके चचेरे परदादा थे. स्कूली शिक्षा लेने के बाद वो अभिनय के लिए लंदन चली गईं. यहां उन्होंने एकेडमी ऑफ म्युजिक और रॉयल एकेडमी और ड्रामेटिक ऑर्ड में एडमिशन लिया. जहां उन्हें स्कॉलरशिप भी मिली.

बांबे टॉकीज स्टूडियो की स्थापना

धीरे-धीरे भारत में फिल्मों का भी विकास होने लगा. और देविका रानी लंदन से वापस इंडिया आ गईं. भारत आकर देविका के पति हिमांशु राय फिल्में बनाना शुरू किए, जिसमें देविका रानी को नायिका के रूप में अभिनय करने का मौका मिला. साल 1933 में उनकी फिल्म कर्मा आई. ये फिल्म इतनी छा गई कि लोग देविका रानी को कलाकार के बदले स्टार सितारा कहने लगे.. इस तरह देविका रानी भारतीय सिनेमा की पहली महिला फिल्म स्टार भी गई.

बांबे टॉकीज स्टूडियो जो कि भारत का पहला फिल्म स्टूडियो में से एक है. इसे देविका रानी और उनके पति हिमांशु ने मिलकर स्थापना किया था. इसका सारा काम हिमांशु राय किया करते थे. लेकिन अचानक उनका निधन हो गया. और सारी जिम्मेदारी देविका रानी पर आ गई. लेकिन कुछ लोगों के साथ के कारण उनका स्टूडियो से नाता पूरी तरह से टूट गया, और वो असहाय हो गई. उन लोगों ने बांबे टॉकीज से संबंध समाप्त कर फिल्मिस्तान नाम का नया स्टूडियो बना लिया. इसके बाद देविका रानी ने पूरी तरह से फिल्मों से नाता तोड़ना दिया.

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