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New Delhi: टेलीविजन शो, इंडियन आइडल के एक एपिसोड का एक क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसे देखकर लाखों दर्शकों की आंखें नम हो गई। इस वीडियो क्लिप में जिसके बारे में दिखाया गया वो हैं मशहूर कवि और गीतकार संतोष आनंद, जिनकी दास्तां ने हजारों लाखों लोगों को रुला कर रख दिया। शो पर जब संतोष आनंद व्हीलचेयर पर पहुंचे तो हिंदी सिनेमा के संगीत के सुनहरे दिन को याद किया।

संतोष आनंद ने बताया कि किस तरह आर्थिक परेशानी से जूझ रहे परिवार में बहू और बेटे ने आत्महत्या कर लिया था। अब उनके जीने का सहारा उनकी पोती है। आनंद की कहानी सुनकर नेहा कक्कड़ ने उन्हें 5 लाख रुपए की मदद की। आनंद ने खुद को स्वाभिमानी बताकर पैसे लेने से इनकार कर दिया, लेकिन नेहा के यह कहने पर कि वे उनसे पैसे उन्हें अपनी पोती समझकर कर स्वीकार कर लें, तब भावुक होकर वे इसके लिए राजी हुए।

संतोष ने अपने जीवन में चंद गाने ही लिखे, लेकिन जो गाने लिखे वो अमर हो गए। उनके लिखे गाने, ‘एक प्यार का नगमा है’ (शोर/1972), ‘मैं ना भूलूंगा’ (रोटी कपड़ा और मकान/1974), ‘जिंदगी की न टूटे लड़ी’ (क्रांति/1981), ‘तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है’ (प्यासा सावन/1981) और ‘मोहब्बत है क्या चीज’ (प्रेम रोग/1982) की गिनती आज भी सर्वकालीन श्रेष्ठ गीतों में होती है।

अपने छोटे से करिअर में आनंद ने दो फिल्मफेयर अवार्ड जीते और राज कपूर, मनोज कुमार, फिरोज खान जैसे दिग्गज अभिनेता-निर्देशकों की फिल्मों में गीत लिखे, लेकिन बाद के वर्षों में फिल्मकारों ने उन्हें भुला दिया। उन्होंने ज्यादातर लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की धुनों के लिए अविस्मरणीय बोल लिखे, लेकिन वे संगीतकारों की किसी लॉबी का हिस्सा नहीं रहे।

बॉलीवुड हमेशा से ऐसा ही रहा है। सिनेमा श्वेत-श्याम से भले ही रंगीन हो गया हो, 100-200 करोड़ रुपये से ऊपर का कारोबार कर रहा हो, लेकिन बुजुर्ग कलाकारों या सिनेमा से जुड़े किसी अन्य ‘रिटायर्ड’ कर्मी के लिए फिक्र करना इसकी फितरत में नहीं।

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